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Uttarakhand History (इतिहास) In Hindi

उत्तराखण्ड का ज्ञान

राज्यउत्तराखण्ड
राजधानीदेहरादून
सबसे बड़ा शहरदेहरादून
जनसंख्या10,086,292
क्षेत्रफल53,483 किमी²
ज़िले13
राजभाषाहिन्दी, संस्कृत
गठन9 नवम्बर 2000
राज्यपालबेबी रानी मौर्य
मुख्यमंत्रीत्रिवेन्द्र सिंह रावत
विधानमण्डलएकसदनीय
विधान सभा 71 सीटें
राज्य सभा3 सीटें
लोक सभा5 सीटें
उच्च न्यायालयनैनीताल
डाक सूचक संख्या24 और 26
वाहन अक्षरUK
ISO 3166-2IN-UT

उत्तराखण्ड का इतिहास

स्कंद पुराण में हिमालय को 5 भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा गया है
(i) हिमालय क्षेत्र (नेपाल)
(ii) कुर्मांचल (कुमाऊं)
(iii) केदारखंड (गढ़वाल)
(iv) जालंधर (हिमाचल प्रदेश)
(v) सुरम्य कश्मीर

पौराणिक ग्रंथों में कुर्मांचल क्षेत्र मानसखंडो के नाम से प्रसिद्ध था। पौराणिक ग्रंथों में उत्तरी हिमालय में सिद्ध गंधर्व यक्ष किन्नर जातियों की सृष्टि और इस सृष्टि का राजा कुबेर बताया गया था।
कुबेर की राजधानी अलकापुरी जो बद्रीनाथ से ऊपर है। पुराणों के अनुसार राजा कुबेर के राज्य में आश्रम ऋषि मुनि तप व साधना करते थे ।
इस क्षेत्र को मानस खंड के साथ-साथ केदारखंड, देवभूमि, तपोभूमि माना जाता है। मानस खंड का कुर्मांचल व कुमाऊं नाम चंद्र राजाओं के शासन काल में प्रचलित हुआ था। कुर्मंचल पर चंद राजाओं का शासन कत्यूरी के बाद प्रारंभ होकर, सन 1790 तक रहा।

सन 1790 में नेपाल की गोरखा सेना ने कुमाऊं पर आक्रमण कर दिया और कुमाऊं राज्य को अपने अधीन कर लिया। गोरखाओं का कुमाऊं पर सन 1790 – 1815 तक शासन रहा। सन 1815 में अंग्रेजों से अंतिम बार परास्त होने के बाद गोरखा सेना नेपाल वापस चली गई। किंतु अंग्रेजों ने कुमाऊं का शासन चंद राजाओं को ना देकर ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन कर दिया। इस प्रकार कुमाऊं पर अंग्रेजों का शासन 1815 से आरंभ हुआ।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार केदारखंड कई गढ़ों में विभक्त हुआ। इन गढ़ों के अलग-अलग राजा थे। जिनका अपना अपना अधिपत्य क्षेत्र था। इतिहासकारों के अनुसार पंवार वंश के राजा ने इस गढ़ों को अपने अधीन कर गढ़वाल राज्य की स्थापना की और श्रीनगर को अपनी राजधानी बनाई। केदारखंड का गढ़वाल नाम तभी प्रचलित हुआ। गढ़वाल के तत्कालीन महाराजा सुदर्शन शाह ने 28 दिसंबर 1815 को टिहरी नाम के स्थान पर जो भागीरथी और भिलंगना नदियों के संगम पर छोटा सा गांव था उसमे अपनी राजधानी स्थापित की। कुछ वर्षों के उपरांत उनके उत्तराधिकारी महाराजा नरेश साह ने ओरथली नामक स्थान पर नरेंद्र नगर नाम से दूसरी राजधानी स्थापित की।

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